HARIDWAR

हरिद्वार:- देवताओं का प्रवेश द्वार

हरिद्वार, का नाम आते ही मन में अध्यात्म की भावना जगने लगती है बाबा भोलेनाथ का तस्वीर जेहन में आने लगता है। हो भी क्यों ना ये है ही भोलेनाथ की नगरी, मैं सुबह 5 बजे हरिद्वार रेलवे स्टेशन पहुंचा था वैसे तो मैंने टिकट दिल्ली से देहरादून के लिए लिया था लेकिन मुझे हरिद्वार घूमने की कुछ ज्यादा ही उत्सुकता थी, इसलिए अपना बैग उठा कर उतर गया ट्रेन से, फरवरी का महीना था तो सर्दी भी अपने चरम पर थी लेकिन मन में हरिद्वार घूमने की प्रबल इच्छा लेकर निकल पड़ा रेलवे स्टेशन से बाहर, जैसे ही बाहर निकला तो लगा जैसे चेहरे पर किसीने बर्फ के गोले फेंक दी हो, सर्द हवाओं ने कुछ ऐसे स्वागत किया था हरिद्वार में।

मैंने फटाफट अपनी टोपी पहनी और टहलते हुए स्टेशन से बाहर सड़क पर आ गया एंट्री गेट के पास ही एक चाय की दुकान खुली थी तो मैंने सोचा इन्ही से चाय पीते पीते सस्ते होटल या लॉज के बारे में पूछ लेता हूं, चाय दुकान वाले भैया ने मुझे बताया की यहां आसपास में बहुत सारे होटल और लॉज हैं। तबतक सूर्य महराज भी अपने आंखे खोलना शुरू कर चुके थे, सर्दी की सुबह के ठंडे ठंडे बयारों का आनंद लेते मैं पैदल ही निकल पड़ा होटल ढूंढने, रात में मैंने दिल्ली से जो ट्रेन पकड़ी थी वो लगभग रात 12 बजे के आसपास की थी इसलिए नींद भी ठीक से नहीं हो पाया, तो मेरा पहला काम था होटल लेकर अपने नित्यकर्मों को निपटा कर जल्दी से बाहर निकल हरिद्वार का भ्रमण किया जाए। मुझे रेलवे स्टेशन के करीब ही होटल मिल गई। होटल शिवमूर्ति जो शिवमूर्ति चौक के पास है। जिसके लिए मुझे 600 रूपए चुकाने पड़े, कमरा ठीक ठाक था साथ में बालकनी से सिटी का व्यू भी मिल रहा था।

Hotel Shivmurti

लगभग 12 बजे मैं निकला खाना खाने के लिए वैसे तो होटल में रेस्टोरेंट की सुविधा भी थी लेकिन थोड़ी महंगी थी। इसलिए मैं निकल पड़ा बाहर थोड़ी दूर चलने के बाद मैं एक होटल में गया और वहां शुद्ध साकाहारी भोजन का आनंद लिया वो भी 80 रूपए में वैसे एक बात बता दूं साकाहारी खाने वालों के लिए हरिद्वार जन्नत है। अब खाना पीना हो चुका था तो मैं वापस होटल आ गया और फिर गूगल बाबा के मदद से आस पास के दर्शनीय स्थल को ढूंढने लगा, सबसे पहले मुझे जाना था “हर की पौड़ी” तो मैंने शाम को निकलने का फैसला किया। शाम के करीब 6:30 बजे मैं हर की पौड़ी पहुंचा वो भी अपने होटल से पैदल चलते हुए जो लगभग 1.8 km के दूरी पर स्थित है। जब मैं अपने होटल से बाहर निकला उस वक्त सूर्यास्त होने को थी सूर्य की रोशनी की जगह सड़कों और गलियों में लगी स्ट्रीट लाईट जल चुके थे। सड़क के दोनों और बहुत सारे रेस्टोरेंट, स्ट्रीट फूड, और पूजा सामग्री की दुकानें थी जहां से खूबसूरत अगरबत्तियों के जलने की सुगंध तो कहीं से लजीज स्ट्रीट फूड के सुगंध आ रही थी और इन सबके बीच हल्की हल्की बारिश भी शुरू हो गई। मुझे तो लगा मैं सिर्फ चलता जाऊं, चलते चलते मैं गंगा नदी के किनारे पहुंच गया जहां नदी के किनारे बने होटलों के खिरकियों से मध्यम मध्यम रोशनी मां गंगा के निरंतर बह रहे लहरों पे पड़ रही थी।

मैं बस अपना कैमरा निकाला और कैद करने लगा इन खूबसूरत पलों को, नदी के उस किनारे पहुंचने के लिए सड़क पुल थी जिसे पार कर मैं दूसरी और आ गया इस ओर नदी के किनारे किनारे घाट बनी हुई थी मैं इसी घाट के सहारे आगे बढ़ता चला गया कुछ देर चलने के बाद मैं हर की पौड़ी पहुंचा यहां काफी भीड़ थी दोनों और बने घाटों के बीच से मां गंगा कलकल करती प्रवाहित हो रही थी, ये एक अविस्मरणीय एहसास था। मैं यहीं किनारे बैठकर मंदिरों से आ रहे घंटियों के आवाज, धूप- अगरबत्तियों की खुशबू और साथ मे मां गंगा के बहते जल तरंगों के शोर में खो गया, तभी अचानक से बारिश तेज हो गई और मुझे वापस अपने होटल आना पड़ा। अगले दिन मैं कई और जगहों को देखकर निकल पड़ा अपने अगले पड़ाव की और जो था ऋषिकेश।

हरिद्वार का महत्व :- हरिद्वार शहर को मायापुरी, कपिला, मोक्षद्वार एवं गंगाद्वार के नाम से भी जाना जाता है। इस शहर का उल्लेख कई प्राचीन हिंदू महाकाव्यों में मिलता है। इस शहर का इतिहास राजा विक्रमादित्य के समय से मौजूद है। यह अपने विश्व प्रसिद्ध धार्मिक केन्द्रों एवं पर्यटक आकर्षणों के लिए जाना जाता है। यहाँ स्थित अधिकतर धार्मिक स्थल पवित्र गंगा नदी के किनारे स्थित हैं।

Beautiful view of haridwar

हरिद्वार के आस पास के स्थान :- यहाँ का सबसे महत्वपूर्ण एवं पवित्र स्थल हर-की-पौड़ी है, जिसे ब्रम्हकुंड के नाम से भी जाना जाता है। यह वह स्थान है जहाँ गंगा नदी पहाड़ों को छोड़कर मैदानों में प्रवेश करती है। यहाँ नदी के घाटों पर कई पदचिन्ह है, जो ऐसा माना जाता है कि हिंदू भगवान् विष्णु जी के हैं। कई भक्त यहाँ विभिन्न प्रथाओं जैसे कि ‘मुंडन’ और ‘अस्थि विसर्जन’ को पूरा करने के लिए आते है। माना जाता है कि यहां अस्थि विसर्जन करने से मोक्ष की प्राप्ती होती है। प्रत्येक 12 वर्ष के पश्चात् यहाँ ‘कुंभ मेला’ आयोजित किया जाता है। संपूर्ण विश्व से भक्त इस भव्य धार्मिक उत्सव में भाग लेने के लिए यहाँ आते हैं।

Har ki Pauri (Haridwar)

प्रसिद्ध धार्मिक स्थल:- यहाँ के कई अन्य प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में माया देवी, मनसा देवी एवं चंडी देवी के मंदिर,वैष्णों देवी मंदिर,एवं भारत माता मंदिर, स्थित है। भारत माता मंदिर, भारत माता को समर्पित है और हरिद्वार में एक मुख्य पर्यटक आकर्षण है। इस मंदिर का निर्माण महान धार्मिक गुरु स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी द्वारा करवाया गया था। इस मंदिर में आठ मंजिलें है जिसमें से प्रत्येक मंजिल कई हिंदू देवी देवताओं एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को समर्पित है। यात्री इस मंदिर में कई महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों जैसे कि महात्मा गांधी, वीर सावरकर एवं सुभाषचंद्र बोस इत्यादि की मूर्तियाँ देख सकते हैं। इन मंदिरों के अलावा सप्त ऋषी आश्रम, श्रवणनाथजी का मंदिर,चिल्ला वन्यजीव अभयारण्य, दक्ष महादेव मंदिर, एवं गौ घाट इत्यादि भी पर्यटकों को बड़ी संख्या में आकर्षित करते हैं।सप्त ऋषी आश्रम अपने महान धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। हिंदू पुराणों के अनुसार इस आश्रम का निर्माण उस स्थान पर किया गया है जहाँ सप्त ऋषी या सात महान साधुओं, अत्री, कश्यप, जमदग्नी, भारद्वाज, वशिष्ठ, विश्वामित्र, एवं गौतम ऋषी ने साधना किया करते थे। हरिद्वार में रहते हुए पर्यटक कई विभिन्न त्योहारों जैसे कि रामनवमी, बुद्ध पूर्णिमा, कांवड़ मेला, एवं दीवाली में भी भाग ले सकते हैं। कांवड़ मेला प्रति वर्ष आयोजित किया जाता है और इस दौरान हरिद्वार में लगभग दो से तीन करोड़ लोग आते हैं।

हरिद्वार कैसे जाएं :- यात्री वायुमार्ग, रेलमार्ग या सड़क मार्ग द्वारा हरिद्वार पहुँच सकते हैं। इस स्थान का सबसे निकटतम घरेलू हवाई अड्डा जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है जो लगभग 20 किमी दूर स्थित है। यह दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से भी नियमित उड़ानों द्वारा जुड़ा हुआ है।

Haridwar

सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन हरिद्वार रेलवे स्टेशन है, जो भारत के सभी मुख्य शहरों से जुड़ा हुआ है। देश के विभिन्न भागों से बसों द्वारा भी यहाँ पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा नई दिल्ली से हरिद्वार के लिए नियमित अंतराल पर बसें उपलब्ध हैं।

हरिद्वार का मौसम :- हरिद्वार में गर्मियों में गर्मी एवं सर्दियों में अत्यधिक ठंड पड़ती है और मानसून में वातावरण में आद्रता होती है। हरिद्वार में भ्रमण के लिये मानसून अच्छा समय नहीं है क्योंकि इस दौरान मौसम बहुत असुविधाजनक होता है। हरिद्वार में भ्रमण करने के लिए सितंबर से लेकर जून की बीच का समय सबसे उपयुक्त है क्योंकि इस समय यहाँ मौसम सुहावना होता है।

Published by officialthefootsteps

I'm a traveller who loves to explore new destinations.trying to write my travel experience as Blog's.

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